मेरे लहू की हर एक बूँद...
तेरी जुस्तजू के सिवा इस दिल ने किया ही क्या है
मेरे लहू की हर एक बूँद तुजसे ये कहना चाहे...
नाम मेरा पूछे कोई तो लब पे तेरा नाम आए
ऐ शमा, देख किस तरह तेरा परवाना खुदको मिटाता जाएँ
दार-उश-शिफा नही पाओ बढ़ते है मकतल-ऐ-मरहम
ऐ सितमगर, देख किस तरह तेरा सौदाई फंना होता जाएँ
इबादत करता हूँ तो आँखों पर तेरा जलवा छाए
ऐ नादान, देख किस तरह तेरा दीवाना खुदाई ठुकराता जाएँ
तेरी जुस्तजू के सिवा इस दिल ने किया ही क्या है
मेरे लहू की हर एक बूँद तुजसे ये कहना चाहे...

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