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Showing posts with the label शेर-O-शायरी

चाँद के पास एक बदली थी...

चाँद के पास एक बदली थी...सितारोंकी वो खलिश थी उस्तुवार उनकी मोहब्बत नादिर-ऐ-रोज़गार थी लेकिन ना वो चाँद जानता था, बदली भी बेख़बर थी तकदीर में दोनोंकी वो रात आख़री थी उमड़कर बरसना ये बदली की किस्मत थी आज भी चाँद ज़मीन पे, उस माशूक के निशान ढूँढता है और उसकी हसरत में आज भी हिलाल होता है कभी... चाँद के पास एक बदली थी...सितारोंकी जो खलिश थी

मेरे लहू की हर एक बूँद...

तेरी जुस्तजू के सिवा इस दिल ने किया ही क्या है मेरे लहू की हर एक बूँद तुजसे ये कहना चाहे... नाम मेरा पूछे कोई तो लब पे तेरा नाम आए ऐ शमा, देख किस तरह तेरा परवाना खुदको मिटाता जाएँ दार-उश-शिफा नही पाओ बढ़ते है मकतल-ऐ-मरहम ऐ सितमगर, देख किस तरह तेरा सौदाई फंना होता जाएँ इबादत करता हूँ तो आँखों पर तेरा जलवा छाए ऐ नादान, देख किस तरह तेरा दीवाना खुदाई ठुकराता जाएँ तेरी जुस्तजू के सिवा इस दिल ने किया ही क्या है मेरे लहू की हर एक बूँद तुजसे ये कहना चाहे...

हर पत्थर की किस्मत में...

हर पत्थर की किस्मत में... मूर्ति की तराश का पेहलू नही होता हर पत्थर की किस्मत में... ताजमेहेल की रूमानी नही होती हर पत्थर की किस्मत में... गरीब के आब्रु की हीफाजात नही होती हर पत्थर की किस्मत में... किसी मजार पर बरस रहा अश्कोंका सावन नही होता हर पत्थर की किस्मत में... मजनु के इतने करीब जाना नसीब नही होता

मै ख़ुद में ही, ए खुदा, तुझे ढूँढता हूँ...

मै ख़ुद में ही, ए खुदा, तुझे ढूँढता हूँ... दायर-ओ-हरम का मजमा नही देता कोई गवाही मुझे-तुझे मिला दे वो मम्बा ढूँढता हूँ ना पा सका तुझे मै बहर-ओ-बार की हद तक हर तलाश हुई नाकाम अर्श-ओ-फर्श की गहराईओं तक तेरा एहसास जगाकर मेरा वजूद जो मिटादे उस अज़ान का मै अब इंतज़ार करता हूँ मै ख़ुद में ही, ए खुदा, तुझे ढूँढता हूँ...

अजीब है दस्तूर मुहब्बत का...

अजीब है दस्तूर मुहब्बत का दिल में बसी...यादें है उनकी धडकनों पर हरदम...पेहरा है उनका आँखो में सजी...तस्वीर है उनकी नस-नस में बसा...प्यार है उनका इस पर भी जुलुम ढाएँ, सनम हमसे वो उल्फत की सनद मांगते है

आसमान पर मेरी नज़र...

आसमान पर मेरी नज़र... छु रही मुझे जमीन की तड़पती सांसें आख़िर कब होगी...आख़िर कब होगी पेहेली पुआर आसमान पर मेरी नज़र... छु रही मुझे मौजोंकी खामोश रवानी आख़िर कब निकलेगा...आख़िर कब निकलेगा हसीन चाँद आसमान पर मेरी नज़र... छु रही मुझे क्वास-ऐ-कुझाकी अधूरी ख्वाँईश आख़िर कब होगा...आख़िर कब होगा खुदाई का दीदार है आसमान पर आशियाना मेरा, फ़िर भी... आसमान पर मेरी नज़र...

तमन्ना है फ़िर से मुलाकात हो...

तमन्ना है फ़िर से मुलाकात हो... नज़रों की गुफ्तगू से दुबारा पेहचान हो फिरसे दिल की अदालत में...ओ मेरे कातिल हम आपकी आरजू के गिरिफ्तार हो अगर लौट जाओ भी तो कुछ घूम नही एक यही सिरा उस इंतज़ार की इब्तिदा हो

फिर तुम याद आएँ...

फिर तुम याद आएँ...और...थोड़े पलों के लिए ही सही सूनसान ज़िंदगी में मेरी आप गुलदुम की चेहेक बनकर छाएँ अब हो जाओ तुम मेरी तस्सवुर से ओझल...ताकी हम दोहरा सके... फिर तुम याद आएँ...और... इतना करीब तो हम तुम्हे रूबरू भी ना पाएँ

यूँ ज़िन्दगी में तनहा हैं हम.....

यूँ ज़िन्दगी में तनहा हैं हम..... सोज़-ऐ-गम जिसका साथ निभाये वो मुसाफिर है हम इस तरह ज़िन्दगी ढली आइने में... अब सिर्फ़ अपने ही अक्स के मुखातिब है हम गुजरता है कारवाँ मायूसी की गलिसे आज अपनी ही हस्ती के कातिल है हम

क्यूँ याद आता है...

क्यूँ याद आता है वो गुजरा हुआ ज़माना दो धड़कते दिलोंका का खामोषसा अफसाना आएँ थे नज़र में, जगी दिल में थी कसक सुलगी हुई थी सांसें, कदम गए थे बेहेक अब ना तो वो मंजर है, खो गया हमसफ़र है आज फिर अकेला चला गम-ऐ-दिल जीवन डगर है

मेरी याद आये तो...

मेरी याद आये तो...और सवेरेका का तर्रन्नुम हो इसी बहाने अपनी चाहत का तुम रोज इकरार करना मेरी याद आये तो...और दोपहार की धुप हो इसी बहाने धानी चुनर ओढ़कर घूँघट में सिमट जाना मेरी याद आये तो...और शाम की तनहाई हो इसी बहाने दो आँसू बहाकर मायूसी जाताना मेरी याद आये तो...और रात की अंगडाई हो इसी बहाने मेरे ख्वाबो में आकर मुजको सताना मेरी याद आये तो...और मुझे सामने पाओ तो इसी बहाने मेरी जान मुजको गलेसे लगाना

अब कहाँ और जायें...

खूबसूरत है आँखें तेरी, जालिम आदाएँ आलम ये मदहोशी का बड़ा गज़ब ढाएँ कातिल निगाहें, हाय! बेचैनी बढाएँ गहरायी में डूबकर इनकी हम जन्नत को पाएँ शिकायत नही शिकस्त है इनसे नज़रे मिलाकर जब वो पलके झुकाएँ भला छोड़कर इनका दामन अब कहाँ और जायें... अब कहाँ और जायें...

ऐ जाना...

हर शक्स से तेरा अब पता पूछता हूँ मेरे दिल के बेहेलने की वो वजह ढुंढता हूँ धुंदले है सितारे, रोशनीके नही सहारे जो दिन में निकल आए ऐसा चांद खोजता हूँ ना रहे मन पे काबू, ना रहे होश बाकि तेरी पहचान की खातिर, ऐ जाना, अब खुदको भूलता हूँ

मेरे लिए क्या हो तुम...

मेरी इन आँखों में मेहेकता ख़्वाब हो तुम जिसे देख कर सुरूर आ जाए ऐसा नशा हो तुम होश खो बैठे है तुम्हारी याद में इस कदर मेरे बीमार-ऐ-दिल की दवा बस तुम्ही हो तुम मिलने कोई सूरत बताओ अब जान पे बन आयी है दिल से निकल रही तडपती अनबुझी आतिष हो तुम

वो मुलाक़ात रूमानी थी...

वो मुलाक़ात रूमानी थी... चुराए जा रहे थे वो नज़र इस कदर बेकरारी की हदसे गुजरने की बात थी वो लाख छुपाना चाहे भी तो क्या होता है मुहब्बत की खुशबू मिटाने की बात थी चलो हमने भी खामोशीका सिला खामोशीसे दिया शमा के लौ में पिघलने की बात थी अब क्या क्या ना बीत रहा इस बरबाद-ऐ-दिल पर बस आपही से मिल रहें दुओंकी बात थी

यूँही उनका ख़याल आया...

यूँही उनका ख़याल आया... खामोशी से गुजरते हुए उस पल पर मानो एक नशासा छाया कैसे बयान करें हम उन जज़बतोंको दिल में फिरसे उभर रहे उन तूफनोंको पिये थे हमने वो जाम उनकी नज़रोंसे नथा उसका कोई मुकाबला किसी मैखानेसे हम पे क्या क्या गुज़री थी जब आपने फ़ैसला सुनाया था एक झूठी शान की खातिर इस दिल को ठुकराया था एक अरसा है बिता पराया हुए उनका साया लेकिन आज ना जाने क्यों... यूँही उनका ख़याल आया...

तुम्हे कभी अपना बना ना सके.....

तुम्हे कभी अपना बना ना सके..... एक आरजू का किनारा हो ना सके फिरते रहे हम दामन में लिए मुहोब्बत के शोलोंको वो एक चिंगारी को मजार दिला ना सके अदाओंकी रोशनिसे आपकी सवाँरा किए हम अपने खयालोंको अफ़सोस आपकी रूहको हमसाया बना ना सके क्योंकर चले थे साथ साथ हम गुमनाम मंजिलकी तलाश में उस अधूरी दास्ताँ को अबतक अंजाम दिला ना सके तुम्हे कभी अपना बना ना सके.....

मदहोशी का बवंडर

कुदरत मट्टी की खुशबू… फूलों की मेहेक बुंदों की छमछम... पंछीयों की चेहेक कुदरत के करिश्मे का अनोखा ये दान एक से बिखराएँ ताजगी और दूजे से बरसाए तान ******************* मन मन का पंछी बड़ा ही चंचल ना तो उसका कोई भरोसा... ना तो उसका कोई ठिकाना कभी तो खेले रंगीन सपनों की होली या फिर नैनोंसे उठाएँ… कभी आसुओं की डोली ******************* एहसास सास है एहसास... जिंदगी का परछाई है एहसास... रोशनी का लेकिन क्या बायाँन दे हम उस एहसास का... जो नही है मौजूद फिर भी उसकी मौजूदगीका ******************* बुलंद इरादे आसमान को छूना… हो तितली का सपना जुगनू चाहे सारा जहाँ... रोशनी से भरना सागर से उठती लहर… नाप रही किनारे को ऐसे बुलंद इरादे हो जिनके… उनका नही कोई जवाब बस इतनिसी बात है समज लीजिए इक कली के मन में ही पनपता है.. कल के गुलशन का ख़्वाब ******************* सूरज और चांदनी जब बात चली दोस्तों में... हर किसीने थामना चाहा... सूरज की किरणों का आँचल मगर हम तो दीवाने है उस चांदनीके... जो करती अंधेरे में डुबे हर कोने को रोशन ******************* तितली और भँवरा तितली और भँवरा दोनों फूल...

खौफ़

हम दिल में खुशीको पनाह दे भी दे… लेकिन खौफ़ रहता है…बेवक्त दीवारोंके ढ़ेह जाने का हम चार कदम मंजिल की तरफ़ बढ़ा तो ले… लेकिन खौफ़ रहता है…जिंदगीके बेमतलब बीत जाने का हम उनकी आँखोंके समुंदर में ख़ुद को डुबो तो ले… लेकिन खौफ़ रहता है…पैमाना बेवजह छलक जाने का हम आपसे इजहारे मोहब्बत कर तो ले…ए सनम… लेकिन खौफ़ रहता है…एक किसी बेज़ुबांकि तौहीन होने का हम दर्द का साया हटा तोह दे इस दिल से… लेकिन खौफ़ रहता है…टूट के बिखर जाने का