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Showing posts from March, 2006

माझ्या मनात तुझ येण जाण आहे

आठवणीचा मेघ सावळा हलकेच बरसून जावा आणि त्यातला प्रत्येक क्षण मोरपिस होउन रहावा तो मोरपिसारा उलगडण्यासाठी तुझ्या मनात माझ येण जाण आहे समुद्राची नज़र चुकवत लाट किनाऱ्यावर धावुन यावी आणि उमटणाऱ्या तुझ्या पाउलांमध्ये अलगद विरून जावी पाउलखुणा त्या जपण्यासाठी तुझ्या मनात माझ येण जाण आहे क्षितिजाच्या भाळावरल्या चित्रकर्मीची फसगत व्हावी आणि मुखाकमला वरती तुझीया सप्तरंगांची उधळण करावी सप्तरंग ते टिपण्यासाठी तुझ्या मनात माझ येण जाण आहे फुलांची होणारी बागेशी ओळख ही कळीपाशीच थांबावी आणि अंगणात तुझीया स्वप्नसुमनांची पखरण व्हावी स्वप्ना फुलात त्या रमण्यासाठी तुझ्या मनात माझ येण जाण आहे विशाल तव हृदयाची आसमंता ही भुरळ पडावी आणि लक्ष लक्ष तारकांना तुझी ओंजळही पुरून उरावी साक्षीदार तया होण्यासाठी तुझ्या मनात माझ येण जाण आहे कंठातल्या अस्फुट शब्दांनी एकदा तरी वाट चुकावी आणि अबोल तुझ्या डोळ्यांना सुरमय करून जावी प्रेमार्त सुर ते छेडण्यासाठी तुझ्या मनात माझ येण जाण आहे तुझ्यात राहून तुलाच फितविण्याचा हा सर्व बहाणा आहे सागरानेही कधीतरी सरितेकडे झेपावे म्हणुन असेल कदाचित ......

When I get BLACK out...

With your senses so refined and the curve of expressions so profound… …would you still beat the tenderness of your thoughts and tame the passions so wild. With your mind so selfless and the world in you so pure… …would you still collapse whilst your dreams shatter and leave desires in labyrinth. With your imagination soaring high and determination getting strong… …would you still succumb to the whip of fate and seek solace in self-pity. The world outside…possesses no ‘eyes’ to behold…bears no ‘heart’ to listen and yet they shall make you ‘feel’ blind and ‘declare’ you deaf-n-dumb. But let no fear creep in. Stay beside your companion…for I am the only ray of hope in your world of darkness. They prefer to call me BLACK. I know not my origin…I know not my end…I am the undiminishing shadow of that timeless wanderer, who gives birth to LIGHT.

मदहोशी का बवंडर

कुदरत मट्टी की खुशबू… फूलों की मेहेक बुंदों की छमछम... पंछीयों की चेहेक कुदरत के करिश्मे का अनोखा ये दान एक से बिखराएँ ताजगी और दूजे से बरसाए तान ******************* मन मन का पंछी बड़ा ही चंचल ना तो उसका कोई भरोसा... ना तो उसका कोई ठिकाना कभी तो खेले रंगीन सपनों की होली या फिर नैनोंसे उठाएँ… कभी आसुओं की डोली ******************* एहसास सास है एहसास... जिंदगी का परछाई है एहसास... रोशनी का लेकिन क्या बायाँन दे हम उस एहसास का... जो नही है मौजूद फिर भी उसकी मौजूदगीका ******************* बुलंद इरादे आसमान को छूना… हो तितली का सपना जुगनू चाहे सारा जहाँ... रोशनी से भरना सागर से उठती लहर… नाप रही किनारे को ऐसे बुलंद इरादे हो जिनके… उनका नही कोई जवाब बस इतनिसी बात है समज लीजिए इक कली के मन में ही पनपता है.. कल के गुलशन का ख़्वाब ******************* सूरज और चांदनी जब बात चली दोस्तों में... हर किसीने थामना चाहा... सूरज की किरणों का आँचल मगर हम तो दीवाने है उस चांदनीके... जो करती अंधेरे में डुबे हर कोने को रोशन ******************* तितली और भँवरा तितली और भँवरा दोनों फूल...

मेरा पहला सेलफोन

मन में आज यह इच्छा है जागी…अपने पास भी हो एक सेलफोन तो तै कर लिया…पर बात अडी मॉडल पर…कौनसा ले नोकिया, मोटोरोला या सँमसंग एक पसंद आया…बड़ा ही लुभावना…सर्व गुणसंपन्न…हमारी शान में चार-चाँद लगानेवाला जेब की तिजोरी टटोली..अब ‘चार चाँद’ वाली शान दुकानदार की मेज पर ही ज़च रही थी सेलफ़ोन तो सिर्फ़ एक चलता फिरता फ़ोन होना है…यह सोचकर…अपने आप को समझाया दिल पर पत्थर रख…एक बजेंट में बैठने वाला ठीक-ठाकसा मॉडल उठाया सेलफ़ोन में अब जान डालने का समय आ गया ‘छोटी उम्र’-‘लंबी उम्र’ की मुटभेड में खामखाँ अपना वक्त गवायाँ अंत में एक्टिवेट कर ही लिया…’प्री-पेड’(' छोटी उम्र’ वाला)ही सही दोस्तोंको खबर दी…रिश्तेदारोंको बताया… अब हमारे पास भी है एक सेलफ़ोन…कृपया नम्बर नोट कर लिजीये सभीने बधाई दी…और कहा..वाहवा!!! अब तो आपको किसी भी वक्त…कही पर भी ट्रक किया जा सकता है यह सुनकर हम ज़रा सावधान हुए अब हाथों में ले यह ‘छोटासा बालमा'…शान से घूम रहे हम इस दुनिया के गलियों में घड़ी घड़ी निहार रहे फ़ोन को…आख़िर कब बजेगी इसकी घंटी यह सोचने का आवकाश की घंटी गूंज उठी हम फुले नही समाये…तुरंत उठालिया सेल फ़ोन…एक गहरी स...

होते अगर हम…

होते अगर हम...सावन की बदली करते हम अक्सर देश-बिदेश की सैर... पहाडोंसे गले मिलनेका आनंद हम उठाते... बरसते धरती पर… करते पूरा नादिया से सागर तक का सफर... लेने दुबारा सावन की बदली का रूप. होते अगर हम... किसी बगिया का फूल अमर हम हो जाते बनकर भगवानके चरणोंकी धूल या किसीकी मजार पर रुकते बनकर बिंती यादों का शूल होते अगर हम... एक चमकता सिंतारा मुठी में कर लेते आसमान सारा सूरज की हस्ती को ललकारते हम और चंदा को करते चुपकेसे इशारा ‘एक तुम्ही हो केवल सूरज हमारा’ ‘एक तुम्ही हो केवल सूरज हमारा’

खौफ़

हम दिल में खुशीको पनाह दे भी दे… लेकिन खौफ़ रहता है…बेवक्त दीवारोंके ढ़ेह जाने का हम चार कदम मंजिल की तरफ़ बढ़ा तो ले… लेकिन खौफ़ रहता है…जिंदगीके बेमतलब बीत जाने का हम उनकी आँखोंके समुंदर में ख़ुद को डुबो तो ले… लेकिन खौफ़ रहता है…पैमाना बेवजह छलक जाने का हम आपसे इजहारे मोहब्बत कर तो ले…ए सनम… लेकिन खौफ़ रहता है…एक किसी बेज़ुबांकि तौहीन होने का हम दर्द का साया हटा तोह दे इस दिल से… लेकिन खौफ़ रहता है…टूट के बिखर जाने का

इन्द्रधनुष

इन्द्रधनुष के दरबार में सज रही…सप्त रंग की मेह्फ़ील । कौन किसकी पहचान है बनता…ये कहना है मुश्कील । लाल रंग में झलक रही है…वीरता की परछाई ।  सिंदूरी रंग से उमड़ आयी है…शाम की अंगडाई ।  सूरज की तपती कीरणोंने…ओढ़ लिया है पीला आँचल ।  हरे रंग में सवरताँ जाए…श्रृष्ति का नव-यौवन ।  अंबर नेहलाकर आस्मानी…ढ़ुंढ़ रहा अपनी परिसीमा ।  फूल-फलों तक रह गयी सीमित…बैंगनी रंग की गरीमा ।  यह रंग होली की जान बने…या बने रंगोली की तकदीर । पर जब मिलकर सामने आए तो बन जाए सुंदर श्वेत लकीर।  - कुसुमांजली